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कॉर्पोरेट जगत से भाजपा को 409, कांग्रेस को मिला 127 करोड़ का चंदा; बसपा को कुछ नहीं

कॉर्पोरेट जगत से भाजपा को 409, कांग्रेस को मिला 127 करोड़ का चंदा; बसपा को कुछ नहीं

नई दिल्ली। भाजपा, कांग्रेस समेत राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टियों को पिछले वित्त वर्ष में 622 करोड़ रुपये का चंदा मिला। इसमें पिछले वर्ष के चंदे (374.61 करोड़ रुपए) के मुकाबले डेढ़ सौ फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

खास बात यह है कि केंद्र की सत्ता पर काबिज भाजपा को सबसे अधिक चंदा मिला है। भाजपा को 437.35 करोड़ चंदे में मिले, वहीं वोट के मुताबिक तीसरी सबसे बड़ी राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी बसपा को कोई चंदा नहीं मिला। ये आंकड़े सभी दलों द्वारा चुनाव आयोग को दिए ब्यौरे के मुताबिक सामने आए हैं।

चुनाव आयोग को दी जानकारी में भाजपा ने बताया है कि उसे 1234 बार दान में कुल 437.35 करोड़ रुपये की रकम मिली। इनमें बड़े व्यावसायिक घराने और व्यक्तिगत दानदाता दोनों शामिल हैं। वहीं बसपा ने बताया है कि उसे 20 हजार रुपये से बड़ा कोई चंदा नहीं मिला। बसपा के साथ यह स्थिति पिछले 10 साल से है।

राकांपा ने घोषित किया है कि उसको 2013-14 में 14.02 करोड़ रुपये मिले थे। एक साल में इसमें 177 प्रतिशत बढ़ोतरी हो गई और 2014-2015 में 38.82 करोड़ रुपये मिले। वहीं भाजपा को पिछले साल के 170.86 करोड़ रुपये के मुकाबले 437.35 करोड़ रुपये मिले। यानी कुल 156 प्रतिशत की बढ़ोतरी।

वीर सत्या इलेक्टोरल ट्रस्ट चंदा देने वालों में पहले नंबर पर है। भारती ग्रुप द्वारा बनाए गए इस ट्रस्ट ने भाजपा, कांग्रेस और राकांपा को साल भर में कुल 132 करोड़ रुपये का चंदा दिया। इसमें से अकेले भाजपा को 107.25 करोड़ रुपये दिए हैं। यह रकम पार्टी को मिले कुल चंदे की 25 प्रतिशत है। वहीं कांग्रेस को इससे 18.75 करोड़ रुपये की राशि मिली है, जो उनके कुल चंदे का 13 प्रतिशत है। ट्रस्ट ने 6 करोड़ रुपये राकांपा को दिए हैं।

मीडिया रिपोट्र्स के मुताबिक इस साल नंबर दो पर रहे जनरल इलेक्टोरल ट्रस्ट ने 2013-14 में किसी दल को कोई चंदा ही नहीं दिया था, लेकिन इस साल 117.30 करोड़ रुपये भाजपा और कांग्रेस को दे दिए। भाजपा को 63.2 करोड़ और कांग्रेस को 54.10 करोड़ रुपये मिले।

कॉर्पोरेट घरानों ने 968 बार दिए चंदे में कुल 576.37 करोड़ रुपये दिए। ये सभी दलों को सालभर में मिले कुल चंदे का 92.61 प्रतिशत है। वहीं 699 व्यक्तियों ने कुल 45.23 करोड़ रुपये दिए। दोनों ही तरीकों में भाजपा सबसे आगे है। उसे व्यावसायिक घरानों से 409.94 करोड़ और अलग-अलग व्यक्तियों से 27.41 करोड़ रुपये मिले। वहीं कांग्रेस को व्यावसायिक घरानों से 127.96 करोड़ रुपये मिले।

भाजपा ने चुनाव आयोग को 20 दानदाताओं से 83.91 करोड़ रु. मिले, लेकिन किसी भी दानदाता का पैन नंबर, पता और पैसे मिलने का तरीका चेक या कैश की जानकारी नहीं है। सिर्फ मिली रकम और चंदा देने वाले का नाम ही बताया है।

चंदा देने वालों दाताओं का पूरा ब्यौरा न देने में कांग्रेस सबसे आगे है। उसने 98 फीसदी मामलों यानी 192 दानों से मिली 138.98 करोड़ की रकम में चेक या डीडी नंबर का जिक्र नहीं किया है। कांग्रेस को 55.88 लाख रुपये नकद मिले, लेकिन ऐसे 11 लोगों के पैन नंबर पार्टी ने नहीं बताए हैं। इसी तरह भाकपा को 8 लोगों से 4.49 लाख रुपये नकद मिले, जिनके पैन नंबर पार्टी ने नहीं बताए हैं। भाकपा ने तो अपने ही 27 राज्य सचिवों से मिले 76.81 लाख रुपये में भी पैन नंबर का जिक्र नहीं किया है।

विभिन्न दलों द्वारा राष्ट्रीय चुनाव आयोग को उपलब्ध कराई गई जानकारी का अध्ययन कर एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉम्र्स और नेशनल इलेक्शन वॉच ने यह रिपोर्ट बनाई है।

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